नीचे इस योजना की पूरी जानकारी विस्तार से दी गई है:
उत्तराखंड सरकार के वन विभाग द्वारा संचालित “वन क्षेत्रों के आस-पास जंगली जानवरों द्वारा जीवन इस योजना के तहत मिलने वाली राशि को दो अलग-अलग फंड्स (राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष और मानव वन्यजीव संघर्ष राहत वितरण कोष) के माध्यम से मिलाकर दिया जाता है।और संपत्ति की हानि के लिए मुआवजा” योजना के अंतर्गत पशुपालकों को एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच प्रदान किया जाता है। यदि जंगली जानवर के हमले में किसी पालतू पशु की मृत्यु होती है, तो उसके मालिक को आर्थिक सहायता दी जाती है।
| पशु का प्रकार | कुल देय धनराशि (₹) | SDRF का हिस्सा (₹) | राहत कोष का हिस्सा (₹) |
| दुधारू पशु: भैंस/गाय/ऊंट/याक/मिथुन आदि (प्रति पशु) | ₹30,000/- | ₹30,000/- | — |
| मालवाहक/परिवहन पशु: ऊंट, घोड़ा (प्रति पशु) | ₹40,000/- | ₹25,000/- | ₹15,000/- |
| खच्चर: (प्रति पशु) | ₹40,000/- | ₹16,000/- | ₹24,000/- |
| बैल: (प्रति पशु) | ₹25,000/- | ₹25,000/- | — |
| बछिया/गधा/पोनी: (प्रति पशु) | ₹16,000/- | ₹16,000/- | — |
| भेड़/बकरी/सुअर: (प्रति पशु) | ₹3,000/- | ₹3,000/- | — |
योजना की पात्रता और शर्तें
यह मुआवजा तभी देय होगा जब पशु की मृत्यु निम्नलिखित जंगली जानवरों के हमले के कारण हुई हो:
- बाघ (Tiger) और गुलदार/लेपर्ड (Leopard)
- हिम तेंदुआ (Snow Leopard)
- भालू (सभी तीन प्रजातियां)
- लकड़बग्घा (Hyena)
- जंगली सूअर (Wild Boar)
- मगरमच्छ/घड़ियाल
- सांप (Snake)
आवेदन एवं भुगतान प्रक्रिया (ऑफलाइन)
- तत्काल सहायता (20% एडवांस): घटना के तुरंत बाद ग्राम प्रधान या स्थानीय जनप्रतिनिधि और संबंधित क्षेत्र के वन रक्षक (Forest Guard) द्वारा पुष्टि किए जाने पर, कुल मुआवजे का 20 प्रतिशत हिस्सा पशु मालिक को तुरंत अग्रिम राशि के रूप में दे दिया जाता है।
- जांच रिपोर्ट: संबंधित रेंज अधिकारी पशु की मृत्यु का प्रमाण पत्र जारी करेंगे। इसके बाद सहायक वन संरक्षक द्वारा अंतिम जांच रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
- अंतिम भुगतान: प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) जांच रिपोर्ट के आधार पर शेष धनराशि को मंजूरी देते हैं। यह पूरी प्रक्रिया घटना के एक महीने के भीतर पूरी होनी अनिवार्य है।
- रिकवरी नियम: यदि अंतिम जांच रिपोर्ट में यह साबित नहीं होता कि पशु की मृत्यु जंगली जानवर के हमले से हुई है, तो पहले दी गई 20% अग्रिम राशि को राजस्व के रूप में वापस वसूल लिया जाएगा।
आवश्यक दस्तावेज
- जंगली जानवर के हमले में पशु की हानि का प्रमाण/प्रमाण पत्र।
- वन विभाग की आधिकारिक जांच रिपोर्ट।
- पशु मालिक के पहचान दस्तावेज (आधार कार्ड आदि)।
- अन्य संबंधित सहायक दस्तावेज।
💡 महत्वपूर्ण सहायता नंबर:
राज्य में कहीं भी मानव-वन्यजीव संघर्ष या जंगली जानवरों की मौजूदगी की सूचना देने के लिए वन विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-890-9715 पर संपर्क करें।